ड्रोन का क्रेज दिनों-दिन बढ़ता जा रहा है. फोटोग्राफी एवं वीडियोग्राफी से हटकर अब कृषि क्षेत्रों में भी ड्रोन का व्यापक पैमाने पर उपयोग किया जाने लगा है. कृषि में इनका उपयोग फसल निगरानी, पौधों के स्वास्थ्य की निगरानी, कीटनाशकों का छिड़काव एवं कीटों या बीमारियों का पता लगाने जैसे विभिन्न कार्यों के लिए तेजी से किया जाने लगा है। सेंसर एवं कैमरों से लैस ड्रोन रियल टाइम में डेटा को कैप्चर कर सकते हैं, जिससे किसान फसल की स्थिति का आकलन कर सकते हैं एवं सिंचाई, खाद और कीटनाशक के इस्तेमाल के बारे में बेहतर निर्णय ले सकते हैं। इस प्रकार भारतीय किसान एक प्रोफेशनल ड्रोन पायलट बनकर अपनी कृषि कार्यों को और अधिक उन्नत एवं आसान बना सकते हैं.
छोटे आकार के टॉय ड्रोन, जिसका अधिकतर उपयोग फोटोग्राफी के लिए किया जाता है, के लिए ना खास ट्रेनिंग की जरुरत होती और ना इसे उड़ाने के लिए लाइसेंस की जरुरत होती है. लेकिन बड़े आकार के ड्रोन या जो अधिक ऊँचाई तक उड़ान भरने की क्षमता रखता हो, बिना लाइसेंस एवं ट्रेनिंग के आप ऑपरेट नहीं कर पाएंगे.
तो आइये सबसे पहले जानते हैं एक ड्रोन पायलट बनने के लिए क्या होनी चाहिए योग्यता.
ड्रोन पायलट बनने की अपनी यात्रा शुरू करने से पहले, आपको इसके लिए निर्धारित की गयी योग्यता को जानना आवश्यक है, जो है:
न्यूनतम आयु: आपकी आयु कम से कम 18 वर्ष होनी चाहिए।
फिटनेस: आपको शारीरिक रूप से स्वस्थ होना चाहिए और आपकी दृष्टि अच्छी होनी चाहिए, क्योंकि आपको ड्रोन को सुरक्षित रूप से संचालित करने की आवश्यकता होगी।
ट्रेनिंग: आपको अपना रिमोट पायलट लाइसेंस (RPL) प्राप्त करने के लिए DGCA द्वारा मान्यता प्राप्त प्रशिक्षण पूरा करना होगा।
ड्रोन रजिस्ट्रेशन: नैनो ड्रोन को छोड़कर सभी ड्रोन को DGCA के साथ रजिस्टर करना आवश्यक है।
अगर आप उपर्युक्त बताई गयी योग्यता को पूरा करते हैं, तो आप एक ड्रोन पायलट बन सकते हैं. देश में DGCA द्वारा मान्यता प्राप्त बहुत सारे संस्थान हैं, जहाँ से आप ड्रोन उड़ाने की ट्रेनिंग एवं सर्टिफिकेशन प्राप्त कर सकते हैं. आइये जानते हैं, DGCA एप्रूव्ड संस्थानों के बारे में.
भारत में प्रमाणित ड्रोन पायलट बनने के लिए DGCA द्वारा एप्रूव्ड ट्रेनिंग प्रोग्राम को पूरा करना आवश्यक है। नीचे बताये गये प्रमुख संस्थान आपको सुरक्षित एवं पेशेवर तरीके से ड्रोन को ऑपरेट करने के लिए आवश्यक स्किल और नॉलेज प्राप्त करने में मदद करने के लिए हाई स्टैण्डर्ड एजुकेशन एवं ट्रेनिंग प्रदान करते हैं। इनके द्वारा कराये जाने वाले ट्रेनिंग कोर्स की फीस सामान्यतया 60 हजार से 1 लाख के बीच होती है.
ड्रोन ट्रेनिंग पूरा करने के बाद आप ड्रोन उड़ाने तो सीख जाते हैं, लेकिन आप बिना सरकार की अनुमति लिए ड्रोन नहीं उड़ा सकते हैं. इसके लिए नेक्स्ट स्टेप है अपने ड्रोन को रजिस्टर करवाना एवं ड्रोन उड़ाने के लिए लाइसेंस प्राप्त करना.
प्रशिक्षण पूरा करने के बाद, आपको रिमोट पायलट लाइसेंस (आरपीएल) परीक्षा पास करनी होगी, जो डीजीसीए द्वारा ऑनलाइन आयोजित की जाती है। यह परीक्षा विमानन नियमों, विनियमों और ड्रोन संचालन के बारे में आपके ज्ञान का परीक्षण करती है। पूरी तरह से तैयारी करना आवश्यक है, क्योंकि परीक्षा में ड्रोन संचालन और सुरक्षा से संबंधित कई विषय शामिल होते हैं।
इसके साथ ही भारत में ड्रोन को कानूनी रूप से संचालित करने से पहले आपको डिजिटल स्काई प्लेटफ़ॉर्म के माध्यम से DGCA के साथ इसे रजिस्टर्ड करना होगा। इसकी रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया काफी सरल रखी गयी है. यहाँ किया गया रजिस्ट्रेशन यह सुनिश्चित करता है कि ड्रोन संचालन सुरक्षित और निगरानी में हो।
एक बार जब आप अपने ड्रोन को रजिस्टर कर लेते हैं, तो आपको एक विशिष्ट पहचान संख्या (UIN) प्राप्त होगी, जो ड्रोन संचालन के लिए अनिवार्य है। UIN प्रत्येक ड्रोन (नैनो ड्रोन को छोड़कर) के लिए यूनिक होता है और ड्रोन के उपयोग को ट्रैक एवं प्रबंधित करने में मदद करता है।
DGCA ने डिजिटल स्काई नाम का एक ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म लॉन्च किया है, जहाँ आप रजिस्ट्रेशन कर ड्रोन उड़ाने की अनुमति एवं सर्टिफिकेशन प्राप्त कर सकते हैं.
भारत में प्रमाणित ड्रोन पायलट बनने के लिए DGCA द्वारा एप्रूव्ड ट्रेनिंग प्रोग्राम को पूरा करना आवश्यक है।
ड्रोन पायलट ट्रेनिंग कोर्स करने के लिए उम्मीदवार की न्यूनतम आयु 18 वर्ष की होनी चाहिए।
DGCA पर ड्रोन को रजिस्टर करने के बाद एक विशिष्ट पहचान संख्या (UIN) दी जाती है, जो ड्रोन संचालन के लिए अनिवार्य होता है।
नहीं! छोटे आकार के टॉय ड्रोन को ऑपरेट करने के लिए किसी प्रकार के लाइसेंस की जरुरत नहीं होती है।